प्रभुप्राप्ति का मार्ग : अहंशून्यता आप सबको खरगोश ओर कछुए की कहानी याद होगी, आज फिर से एक महत्वपूर्ण तथ्य को समझने के लिए आप सबक...
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परमात्मा की ओर केवल वही गति कर पाते है, अर्थात जो सब भांति स्वयं से निर्भार हो जाते है, अर्थात जिसमे कोई अहम् नहीं है, जैसे पतंग आकाश में उड़ती है आगे ओर आगे बढ़ना चाहती है, किन्तु वह मुक्त नहीं है, जब तक उसकी डोर उड़ानेवाले से बंधी है वह भारयुक्त है, उड़ाने वाले का अहंकार उसे बांधे हुए है लकिन जैसे ही काट जाती है, मुक्त हो जाती है, कोई अहंकार उसकी बाधा नहीं है, वह खुले आसमान में बहती जाती है, निर्बाध गति से बढ़ती जाती है, ऐसे ही हमारी आत्मा जब तक मोह,ममता,अहंकार आदि विषयो के भार से मुक्त नहीं हो जाती परमात्मा से नहीं मिल सकती,
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Home Vikas Aggarwal Gopi Geet गोपी गीत : प्रथम श्लोक (आत्मभाव) Gopi geet pratham shlok ka sampuran arth hindi mein go...
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-नवम श्लोक- तव कथामृतं तप्तजीवनं कविभिरीडितं कल्मषापहम् । नवम श्लोक में गोपियों ने प्रभु कैसे मिल सकते है, या कहाँ निवा...
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