मंत्र साधना WATCH VIDEO मंत्र साधना कोई सधारण विषय नहीं है, मंत्रो में अनु के समान अथाह शक्ति विध्यमान रहती है, और इस शक्ति को क...
मंत्र साधना WATCH VIDEO
मंत्र साधना कोई सधारण विषय नहीं है, मंत्रो में अनु के समान अथाह शक्ति विध्यमान रहती है, और इस शक्ति को किसी भी तरह प्रयोग करना उसी प्रकार घातक है जैसे बारूद का उपयोग अग्नि के निकट करने से सर्वनाश हो जाता है ऐसे ही मंत्रो का गलत प्रयोग मनुष्य को विनाश की और ले जा सकता है, मंत्रो का उपयोग केवल अधिकारों की सीमा में ही करना चाहिए, जप की जो विधाये और जो प्रयोग की सिद्धिया बताई गयी है, उसी अनुसार सिद्ध मंत्रो का ही जप करना उचित होता है,
हमारे ऋषियों मुनियो ने जन सधारण के उपयोग के लिए इन मंत्रो को अलग रूप से वर्णन किया है जो हम उपयोग कर सकते है, जैसे प्रणव का उप मंत्र ऐं ह्रीं क्लीं इत्यादि मंत्र दिए है, जैसे सीधे व्यक्त विद्युत को नहीं छुआ जा सकता अगर सीधे बिजली को छू लेंगे तो क्या होगा? बीज मंत्र कभी भी उच्चे स्वर से नहीं बोलने चाहिए, क्यों? क्योंकि मंत्र अर्थात मंत्रणा है, मंत्रणा जैसे गुप्त होती है तो मंत्र तो और भी अधिक गुप्त होते है, आजकल मंत्रो की सी.डी. मिलती है कोई भी कही भी चला लेते है, यह सर्वथा अनुचित है,मंत्रो में विहित शक्ति का प्रभाव हमे विचलित कर सकता है, जैसे गाडी से सफर करते समय यदि मन्त्रात्मक स्वर हम सुनते है, और वह मंत्र शक्ति गाडी चलाने वाले को प्रभावित कर दे तो क्या होगा? संतुलन बिगड़ जाएगा और अनिष्ट होने की संभावना होगी न,
फल चाहिए वेद विहित लकिन विधि हम नहीं अपनाते शास्त्रों की, यदि फल शास्त्र निहित चाहिए तो विधि भी तो उसी अनुसार ही करना होगा, दवा का मारा रोगी जैसे पीड़ित होता है, वैसे ही अंधे गुरु के दिए बीज मंत्र चेले को भी नष्ट कर देते है,
मंत्र जपना ही है तो सीधे राम नाम मंत्र है, हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे आदि मंत्र कीजिये भगवान् शिव तो ॐ का जप करने के अधिकारी है फिर भी राम नाम तारक मंत्र का जप करते है, इसलिए भगवन्नाम कीर्तन कीजिये, सार्वजनिक रूप से कहि भी कैसे भी, लेकिन वैदिक मंत्र का जाप करना और फल पाना चाहते है तो वेदो के अंदर दी गयी विधि से ही मंत्र जाप करना होगा, जैसे हर दवा अमृत है और हर दवा विष भी है, ऐसे ही हर मंत्र मारक भी है और तारक भी है, यदि अधिकारों और विधि का उलंघन किया तो मंत्र तारक न होकर मारक हो जाएगा,
यदि हम लोगो को मंत्र जाप करना है तो केवल और केवल हरिनाम रुपी मंत्रो का या भगवान् के नाम संकीर्तन का ही अवलंब लेना चाहिए, मंत्र साधना का अधिकार सभी को है किन्तु हर मंत्र को जपने की विधि होती है, यदि हमे वेदो शास्त्रों में वर्णित फल की इच्छा से किसी मंत्र का जाप करना है तो उसका फल भी उसी प्रकार लेना है तो उसमे बताई गयी विधि से ही जप करना होगा, ऐसा कभी नहीं होगा की मंत्र और फल तो शास्त्रोक्त चाहिए विधि अपने इच्छा की ऐसे आधा तीतर आधा बटेर नहीं चलता, हित के बजाए अहित होगा अनिष्ट होगा इसलिए मंत्र सुनने बोलने से पहले इनकी शक्तियों का जानना जरूरी है, हम जो विधि पालन नहीं कर सकते इसके लिए संतो ने महापुरुषों ने सीधे सीधे भगवन्न नाम रुपी मंत्र दिए है जिनका अनुपालन हमे करना चाहिए....
भगवन्नाम रुपी मंत्र सदैव तारक होते है, जिनका उच्चारण प्रयोग हम कही भी किसी भी रूप से करेंगे तो अनिष्ट नहीं होगा, नारायण नारायण, हरे कृष्ण हरे रामा, राम राम,हरि हरि , राधेश्याम , सीताराम, ऐसे ऐसे भगवन्नाम है जिनमे मंत्रो के जैसी अथाह शक्ति है, जो सर्वसिद्ध मंत्र है, जिन्हे मोबाइल में सुनिए, तेज आवाज में बोलिये सभा में गाइये, एकांत में जपिये कोई विशिष्ट विदी नहीं है हर स्थिति में तारक है, इसलिए हरेर्नाम हरेर्नाम केवलं ही श्रेष्ठ है....जय श्री राम
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