कृष्णप्रेमी के दिल का दर्द क्या होता है, ये कोई कृष्ण प्रेमी ही बता सकता है, जब किसी के ह्रदय में वृन्दावन जाने की राधारमण जी के दर्शन की...
कृष्णप्रेमी के दिल का दर्द क्या होता है, ये कोई कृष्ण प्रेमी ही बता सकता है, जब किसी के ह्रदय में वृन्दावन जाने की राधारमण जी के दर्शन की तेदेपा उठती है और वह जाने में असमर्थ होता है, तो वृन्दावन आने जाने वालो से फ़रियाद करता है की, कोई तो मेरी डाक भी भुगता दो मेरे रमन बिहारी जी को उनसे मेरे दिल का हाल सुना दो, कोई तो मेरी पुकार मेरे रमणबिहारी के कानो तक पंहुचा दो,
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कोई जाए जो वृन्दावन मेरा पैगाम ले जाना
कोई जाए जो वृन्दावन मेरा पैगाम ले जाना
मैं खुद तो जा नहीं पाउ मेरा प्रणाम ले जाना
कोई जाए जो वृन्दावन मेरा पैगाम ले जाना
जब राधारमण जाओ उन्हें तुम देखते रहना
मेरा जो हाल पूछे तो जुबा से कुछ नहीं कहना
बहा देना कुछ एक आंसू मेरी पहचान ले जाना
कोई जाए जो वृन्दावन मेरा पैगाम ले जाना
मैं भटकु दर बदर कृष्णा जो तेरे मन में आ जाए
मेरी जो सांस अंतिम हो वो निकले तेरी चौखट पे
दास हूँ मैं तेरे दासो का मुझे बिन दाम ले जाना
कोई जाए जो वृन्दावन मेरा पैगाम ले जाना
कोई जाए जो वृन्दावन मेरा पैगाम ले जाना
कोई जाए जो वृन्दावन मेरा पैगाम ले जाना
श्री वृन्दावन जय वृन्दावन श्री वृन्दावन जय वृन्दावन
कोई जाए जो वृन्दावन मेरा पैगाम ले जाना
कोई जाए जो वृन्दावन मेरा पैगाम ले जाना
मैं खुद तो जा नहीं पाउ मेरा प्रणाम ले जाना
कोई जाए जो वृन्दावन मेरा पैगाम ले जाना
मैं खुद तो जा नहीं पाउ मेरा प्रणाम ले जाना
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